
दिल्ली की एक अदालत के स्पेशल जज को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है. जिस जज ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को नेशनल हेराल्ड से जुड़े ED मामले में बड़ी राहत दी, उसी जज को बदलने की मांग राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार ने की है. हालांकि, अदालत ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है. शुक्रवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने और अपने परिवार के खिलाफ चल रहे मामलों को दूसरी अदालत में टांसफर करने की मांग की थी. राबड़ी देवी ने आरोप लगाया था कि विशेष जज विशाल गोग्ने उनके मामलों में पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं.
लालू परिवार के खिलाफ ये मामले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किए गए हैं, जो लैंड फॉर जॉब्स और आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े हैं. इन मामलों में राबड़ी देवी के अलावा उनके पति लालू प्रसाद यादव, बेटे तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्य आरोपी हैं. कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने राबड़ी देवी की याचिका का कड़ा विरोध किया. जांच एजेंसी ने कहा कि यह ट्रांसफर याचिका दुर्भावनापूर्ण है और अदालत को गुमराह करने का प्रयास है. सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि राबड़ी देवी ने जानबूझकर जज पर सवाल उठाकर न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है. एजेंसी के अनुसार, जब तक लंबी बहस के बाद आरोप तय नहीं हो गए और मामला सबूतों के चरण में नहीं पहुंच गया, तब तक किसी तरह के पक्षपात की बात नहीं उठाई गई थी.
