
बिहार के निबंधन कार्यालयों यानी रजिस्ट्री ऑफिसों में असामाजिक तत्वों की बेरोकटोक आवाजाही ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिकॉर्ड रूम से जमीन के मूल दस्तावेज गायब कर फर्जी कागजात तैयार किए जा रहे हैं और उन्हीं के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री करवा ली जाती है. यह खेल कोई नया नहीं है, बल्कि वर्षों से चल रहा है. हैरानी की बात यह है कि अररिया रजिस्ट्री ऑफिस के रजिस्टर में छेड़छाड़ के मामले में 10 लोगों पर नामजद FIR दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
भूमि माफिया का दबदबा
दरअसल, बिहार सरकार भूमि माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही है, लेकिन अररिया के रजिस्ट्री ऑफिस में असामाजिक तत्वों का कब्जा बरकरार है. रिकॉर्ड रूम में मूल दस्तावेज गायब कर फर्जी कागजात बनाए जा रहे हैं. विभागीय अधिकारी मानते हैं कि यह समस्या सिर्फ अररिया तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे बिहार के रिकॉर्ड रूम में फैली हुई है. बता दें कि रिकॉर्ड रूम के रजिस्टर में छेड़छाड़ के मामले में नगर थाने में 10 लोगों पर नामजद FIR दर्ज हुई, लेकिन दो दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई. सवाल उठता है कि माफिया रजिस्ट्री ऑफिस में कैसे पैठ बनाए हुए हैं.
ऑफिस में बेरोकटोक एंट्री
अररिया निबंधन कार्यालय में कोई भी बिना रोक-टोक घुस सकता है, कोई बैरियर (बाधा) नहीं है. भूमि माफिया सिंडिकेट की पहुंच इतनी गहरी है कि वे रिकॉर्ड रूम के मूल अभिलेख के पन्ने फाड़कर फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं और रजिस्टर में चिपका देते हैं. इसी फर्जी कागज के आधार पर वे किसी की निजी जमीन को अपना बताकर रजिस्ट्री करवा लेते हैं. यहीं से जमीन कब्जाने की कहानी शुरू होती है. अररिया रजिस्ट्री ऑफिस के कातिब अरुण वर्मा ने बताया कि माफिया सिंडिकेट चारों ओर बैठे रहते हैं. उनका कागज तैयार होने पर ही रजिस्ट्री के लिए आते हैं.
