
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक ऐसे फैसले ले रहे हैं, जो पूरी दुनिया में हलचल बढ़ा रहे हैं. वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद जहां अमेरिका ने सीधे तौर पर तेल पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, वहीं अब ट्रंप की नजर दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर टिकी हुई है. व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अपने रणनीतिक हितों के लिए किसी भी विकल्प से पीछे नहीं हटेगा, यहां तक कि सैन्य ताकत के इस्तेमाल से भी.
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ऐलान किया कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित लेकिन उच्च गुणवत्ता वाला तेल सौंपेगी. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा और इससे मिलने वाली रकम उनके नियंत्रण में रहेगी, ताकि इसका इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के हित में किया जा सके. उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को इस योजना को तुरंत लागू करने के निर्देश भी दे दिए हैं. ट्रंप के मुताबिक, यह तेल स्टोरेज जहाजों के जरिए सीधे अमेरिका के बंदरगाहों तक लाया जाएगा.
तेल कंपनियों के साथ बैठक में जुटे ट्रंप
अमेरिकी स्पेशल फोर्स बीते शनिवार ही वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर धावा बोलकर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़कर न्यूयॉर्क ले आई है. अमेरिकी सेना के इस सीक्रेट ऑपरेशन के बाद यह फैसला सामने आया है. जानकारों के मुताबिक, ट्रंप द्वारा घोषित तेल की मात्रा वेनेजुएला के 30 से 50 दिनों के कुल उत्पादन के बराबर है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी कीमत करीब 2.8 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी जा रही है. हालांकि अमेरिका खुद रोजाना करीब 1.38 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन करता है, लेकिन वेनेजुएला के विशाल भंडार पर नियंत्रण ट्रंप की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
