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ईरान इन दिनों ऐतिहासिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को दो हफ्ते हो चुके हैं. लगातार तीसरी रात देश के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जिससे सत्ता पर दबाव और बढ़ गया है. विपक्षी खेमे का दावा है कि इन प्रदर्शनों ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दमनकारी तंत्र को कमजोर किया है और सुरक्षा बलों के भीतर भी असंतोष के संकेत दिखाई देने लगे हैं. कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि कई सुरक्षाकर्मियों ने आदेश मानने से इनकार किया है या अपनी ड्यूटी छोड़ दी है, जबकि शासन का समर्थन करने वाले कम ही रह गए हैं.
इन प्रदर्शनों में आग में घी डालने का काम अमेरिका में निर्वासित पू्र्व शाह के बेटे रजा पहलवी भी कर रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान के लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि वे पीछे नहीं. रविवार को एक बार फिर व्यापक प्रदर्शन की योजना बनाई गई है. विपक्षी नेतृत्व ने लोगों से अपील की है कि वे शाम 6 बजे शहरों की मुख्य सड़कों पर परिवार और मित्रों के साथ समूहों में निकलें, एक-दूसरे से अलग न हों और जोखिम भरी गलियों से बचें. रजा पहलवी का संदेश साफ है कि वे सरकार पर संगठित और शांतिपूर्ण उपस्थिति के जरिए बड़ा दबाव बनाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं.
