
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है. ताजा घटनाक्रम में ट्रंप ने न सिर्फ वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवा दिया, बल्कि अब खुद को वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर डाला. इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या ट्रंप अब खुद को किसी राजा की तरह देखने लगे हैं, जो दूसरे देशों की संप्रभुता को नजरअंदाज कर रहे हैं. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में खुद को ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट ऑफ वेनेजुएला’ बताया. यह पोस्ट उस कार्यकारी आदेश के कुछ ही दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने वेनेजुएला के तेल से होने वाली भविष्य की कमाई पर अमेरिकी नियंत्रण मजबूत कर दिया.
आदेश के तहत अमेरिका में रखी गई वेनेजुएला की तेल आय को जब्त होने से बचाया गया है, लेकिन इसका इस्तेमाल अमेरिकी विदेश नीति की प्राथमिकताओं के अनुसार करने की बात कही गई है. व्हाइट हाउस के मुताबिक इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वेनेजुएला की तेल आय ‘शांति, समृद्धि और स्थिरता’ के लिए इस्तेमाल हो. लेकिन आलोचकों का कहना है कि असल में यह तेल पर सीधा कब्जा है. एक्सॉन मोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी अमेरिकी कंपनियों के वेनेजुएला पर अरबों डॉलर के दावे पहले से ही लंबित हैं.
