
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां खुले तौर पर ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन और कार्रवाई के संकेत दे रहे हैं, वहीं अमेरिका की सेना में इस पर गंभीर मंथन चल रहा है. सवाल यह नहीं है कि अमेरिका कदम उठाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि कब और किस हद तक. इसी बीच ट्रंप को अमेरिकी सेना ने वही जवाब दिया है जो कभी सैम मानेकशॉ ने इंदिरा गांधी को कहा था. ये घटना इतिहास के उसे चर्चित मोड़ की याद दिलाता है, जिससे बांग्लादेश बना. यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों की मदद करने का मन बना लिया है. हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि यह मदद किस रूप में होगी और कब दी जाएगी. सूत्रों के अनुसार ट्रंप प्रशासन के भीतर बीते कुछ दिनों से लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने मूल रूप से यह फैसला कर लिया है कि अमेरिका ईरानी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा होगा, लेकिन तरीका और समय अभी तय नहीं है.
ईरान में अमेरिका क्या-क्या कर सकता है?
शनिवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान आजादी की ओर देख रहा है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है. इसके बाद अमेरिका में चर्चाएं तेज हो गईं. इन चर्चाओं में कई विकल्प रखे गए हैं, जिनमें सीधे सैन्य हमले से लेकर साइबर अटैक, इंटरनेट सपोर्ट और स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट सेवाएं उपलब्ध कराने तक के सुझाव शामिल हैं. सूत्रों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन यह नहीं मानता कि ईरानी शासन तुरंत खत्म होने वाला है, लेकिन यह जरूर माना जा रहा है कि बीते एक हफ्ते में अमेरिका को ऐसी दरारें नजर आई हैं जो पहले नहीं दिखती थीं. इंटरनेट ब्लैकआउट, प्रदर्शनकारियों की भारी संख्या और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई ने अमेरिका को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है.
