
लड़ाई ‘रोटी’ से शुरू हुई, पर ‘आजादी’ पर आ टिकी: भले ही मौजूदा प्रदर्शनों की शुरुआत जीवन-यापन की बढ़ती लागत (Cost of Living) और आर्थिक तंगी से हुई थी, लेकिन अब यह मुद्दा बहुत पीछे छूट गया है. जब ब्रिटेन की मंत्री हेइडी एलेक्जेंडर कहती हैं कि वे ईरान में “मौलिक स्वतंत्रता” (Fundamental Freedoms) और “सच्चे लोकतांत्रिक मूल्यों” की वापसी चाहती हैं, तो उनका इशारा सीधे तौर पर ईरान की महिलाओं की स्थिति की ओर होता है. ईरान में एक महिला होना हर दिन एक राजनीतिक संघर्ष है. वहां हिजाब से लेकर बोलने की आजादी तक—सब कुछ सरकार तय करती है. इसलिए, जब भी कोई प्रदर्शन होता है, चाहे वह पेट्रोल के दाम पर हो या पानी की कमी पर, महिलाएं उसे अपने “अस्तित्व की लड़ाई” (Struggle for Freedom) में बदल देती हैं. उनके लिए यह सरकार सिर्फ एक प्रशासक नहीं, बल्कि वह “दमनकारी शासन” है जिसने उनकी सांसों पर पहरा लगा रखा है
