
पिछले साल 28 दिसंबर से ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होता जा रहा है. अब तक 300 से ज्यादा लोग मारे गए, और दो हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान में तख्तापलट हो सकता है. हाल में वेनेजुएला, नेपाल और बांग्लादेश में जिस तरह से सरकार बदली है, उसके आधार पर इन अटकलों को और हवा दी जा रही है. वहीं, इन सबमें अमेरिका की भूमिका को लेकर भी चर्चा होती रहती है.
ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शनों, बढ़ते दमन और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुली असहमति के बीच यह सवाल तेज हो गया है कि क्या देश किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है? ईरान की जनता में हालिया महीनों में महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदियों और सत्ता के केंद्रीकरण के खिलाफ नाराजगी है.
बांग्लादेश की अगर बात करें तो शेख हसीना की सरकार को गिराने से पहले एक राजनीतिक विरोध शुरू हुआ. यह विरोध धीरे-धीरे युवाओं के बीच पहुंचा. युवाओं ने हसीना की सरकार के खिलाफ काफी असंतोष और नाराजगी जाहिर की. परिमाण यह निकला कि देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और कई लोगों की जानें चली गईं. आखिर में शेख हसीना की सरकार गिर गई.
