
बिहार के प्रसिद्ध दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को निधन हो गया. वह लगभग 94 वर्ष की थीं और कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं.महारानी कामसुंदरी देवी भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रयासों से दरभंगा राज की गौरवशाली इतिहास आज भी जीवित है. बता दें कि महारानी कामसुंदरी देवी ने ही वर्ष 1989 में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना कर दरभंगा राज की ऐतिहासिक धरोहर को संस्थागत रूप दिया. पति महाराजा कामेश्वर सिंह के निधन के वर्षों बाद उन्होंने यह महसूस किया कि यदि समय रहते पहल नहीं की गई तो मिथिला की अनमोल विरासत बिखर जाएगी. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी निजी संपत्ति, दुर्लभ पुस्तकें, पांडुलिपियां, चित्र, फोटोग्राफ और दस्तावेज फाउंडेशन को समर्पित कर दिए. यह कदम सिर्फ एक ट्रस्ट की स्थापना नहीं था, बल्कि इतिहास को भविष्य से जोड़ने का प्रयास था.
बता दें कि महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन दरभंगा राजघराने की अमूल्य धरोहर है. फाउंडेशन मिथिला की सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक विरासत को बचाने का काम करता है. महाराजा कामेश्वर सिंह की अंतिम पत्नी महारानी कामसुंदरी देवी ने इसकी स्थापना 1989 में की थी. बता दें कि महाराजा कामेश्वर सिंह का निधन 1962 में हुआ था जिसके बाद महारानी ने उनकी स्मृति में यह ट्रस्ट बनाया. आज यह फाउंडेशन बिहार के दरभंगा में कल्याणी निवास पर स्थित है और दुनिया भर के विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है.
