
ट्रेन के अंदर नशे की हालत में पेशाब करने जैसे गंभीर आरोपों से घिरे एक न्यायिक अधिकारी को राहत देने वाले फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उक्त अधिकारी को दोबारा नौकरी पर बहाल करने का निर्देश दिया गया था. शीर्ष अदालत ने इसे “घिनौना” और “सबसे गंभीर अनुशासनहीनता” करार दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई इतनी नाराजगी?
यह मामला एक क्लास-2 सिविल जज से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि वह 16 जून 2018 को भोपाल से जबलपुर जाते समय ट्रेन में शराब के नशे में था. सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह आचरण न्यायपालिका की गरिमा के बिल्कुल खिलाफ है.
