
भारतीय रेलवे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दशकों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के दिल को तोड़ दिया है. रिटायरमेंट के वक्त सम्मान के तौर पर दिए जाने वाले गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल अब नकली निकले हैं. जांच में साफ हुआ है कि ये मेडल चांदी के नहीं, बल्कि लगभग पूरी तरह तांबे से बने थे. इनमें चांदी की मात्रा सिर्फ 0.23 प्रतिशत पाई गई. यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों की भावनाओं का है, जिन्होंने पूरी जिंदगी रेलवे की सेवा में लगा दी.
यह हमारी जिंदगी की कमाई थी
पश्चिम मध्य रेलवे से रिटायर हुए टीके गौतम, जो चीफ लोको इंस्पेक्टर रह चुके हैं, कहते हैं कि यह सिक्का मेरे लिए एक यादगार नहीं, बल्कि मेरी पूरी नौकरी की पहचान थी. पहले ऐसे मेडल सरकारी टकसाल में बनते थे. अब लगता है कि हमारा सम्मान ही नकली था. उनकी तरह कई रिटायर्ड कर्मचारी अब परेशान हैं कि जो सम्मान उन्हें मिला, वो भी फर्जी निकला.
36 साल की सेवा के बाद लगा धो
