
खामेनेई के देश में मचा हाहाकार अब थमता दिखाई दे रहा है. एक तरफ प्रदर्शनकारियों की फांसी की सजा रोक दी गई है. दूसरी तरफ ट्रंप ने भी कह दिया है कि ‘हम अटैक नहीं करेंगे’. इन सबके बीच ईरान का एक दावा जबरदस्त हलचल मचा रहा है. खामेनेई पहले ही चीख-चीख कर बोल रहे थे कि ईरान की सड़कों पर उग्रवादी विदेशी ताकतों की साजिश है. वहीं, अब दो बड़े देशों की खुफिया एंजेसियों की साजिश सामने आई है. दावा किया जा रहा है कि ये एजेंसियां 300 डॉलर बांटकर ईरान में तबाही मचा रही थीं.
क्या है ब्रिटिश-इजरायली एजेंसी की मिलीभगत?
ईरान के सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी M16, इजरायली मोसाद के साथ मिलकर ईरान में हत्याओं, तोड़-फोड़ और आगजनी को अंजाम दे रही थी. इन दोनों एजेंसियों ने 300 डॉलर देकर ईरान में जासूस खड़े किए थे, जो मस्जिदों को जला रहे थे.
ईरान ने पकड़े थे जासूस
दावा किया गया है कि जून 2025 में जब ईरान पर अटैक हुआ था. उस दौरान भी एक बड़े ‘आतंकवादी सेल’ को पकड़ा गया था, जो भीड़भाड़ वाले इलाकों और मस्जिदों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था. इन समूहों को कथित तौर पर विदेशी ताकतें ड्रोन और विस्फोटकों भेज रही थीं.
