
अमेरिका में हरित ऊर्जा उद्योग को बड़ा झटका देते हुए ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया. सरकार ने निर्माणाधीन सभी बड़े ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स के फेडरल लीज तुरंत निलंबित कर दिए हैं. वह विंड टर्बाइन जो समुद्र में लगी हैं. प्रशासन का दावा है कि ये परियोजनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं, हालांकि इन खतरों को लेकर अब तक कोई ठोस सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की गई है. यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस लंबे विरोध का सबसे आक्रामक कदम माना जा रहा है, जिसमें वह लगातार ऑफशोर विंड एनर्जी को निशाना बनाते रहे हैं.
ट्रंप के इस आदेश से क्या होगा असर?
इस आदेश से अरबों डॉलर का निवेश खतरे में पड़ गया है और करीब 6 गीगावॉट नई बिजली उत्पादन क्षमता अटक सकती है, जो अगले कुछ वर्षों में ग्रिड से जुड़ने वाली थी. यह आदेश अटलांटिक महासागर में बन रही पांच बड़ी ऑफशोर विंड परियोजनाओं पर लागू होगा. इनमें सबसे अहम है वर्जीनिया का विशाल ऑफशोर विंड फार्म, जो पूरा होने पर अमेरिका का सबसे बड़ा ऐसा प्रोजेक्ट बन सकता था. यह परियोजना 2026 के अंत तक पूरी होनी थी और वर्जीनिया को बिजली सप्लाई करने वाली थी. यहीं पर दुनिया का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर मौजूद है और ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है. न्यू इंग्लैंड के तट के पास बन रही अन्य परियोजनाएं भी इस फैसले से प्रभावित हुई हैं.
क्या रडार को होती है दिक्कत?
अमेरिकी गृह मंत्रालय (Interior Department) ने कहा कि यह फैसला डिपार्टमेंट ऑफ वॉर (रक्षा विभाग) की गोपनीय रिपोर्टों में बताए गए राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों के आधार पर लिया गया है. हालांकि यह नहीं बताया गया कि ये खतरे क्या हैं. बयान में यह भी कहा गया कि विंड टर्बाइनों की घूमती हुई ब्लेड और उनकी रोशनी की रिफ्लेक्शन रडार सिस्टम में बाधा डाल सकती है, जिससे निगरानी और रक्षा तंत्र प्रभावित हो सकता है
