
डोनाल्ड ट्रंप के बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस फॉर गाजा’ में शामिल होने का पाकिस्तान का फैसला अब उसी के लिए मुसीबत बनता दिख रहा है. पाकिस्तान समेत 8 मुस्लिम देश इसमें शामिल हो रहे हैं. जैसे ही पाकिस्तान ने बुधवार को इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि की, देश के भीतर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई. विपक्षी नेता, पूर्व राजनयिक और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार पर भड़क उठे हैं और सवाल कर रहे हैं कि क्या पाकिस्तान ने अमेरिका के करीब जाने की कीमत को सही से समझा भी है. अमेरिका का यह बोर्ड गाजा में युद्ध के बाद शांति व्यवस्था, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए बनाया गया है. डोनाल्ड ट्रंप इसे स्थायी शांति का ढांचा बता रहे हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इसमें शामिल होने का न्योता दिया गया था, जिसेउन्होंने स्वीकार कर लिया.
पाकिस्तान में लोग अपनी सरकार से क्यों हैं नाराज?
पाकिस्तानी सरकार इसे शांति की दिशा में योगदान बता रही है, लेकिन देश के भीतर इसे फिलिस्तीन के हक से समझौता माना जा रहा है. सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इस फैसले को नैतिक रूप से गलत और अस्वीकार्य बताया. उन्होंने कहा कि यह पहल फिलिस्तीनियों से उनके अपने शासन का अधिकार छीन लेती है. उनके मुताबिक यह योजना गाजा को बाहरी ताकतों के हाथों सौंपने जैसा है, जो नए दौर की उपनिवेशवादी सोच को दिखाती है.
