
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के राज में मीडिया का गला घोंटा जा रहा है. हालात इतने खराब हैं कि पत्रकारों पर ‘एंटी-टेररिज्म लॉ’ यानी आतंकवाद-रोधी कानून लगाए जा रहे हैं. एक ताजा रिपोर्ट ने इसे यूनुस सरकार का अब तक का सबसे ‘शर्मनाक कदम’ बताया है. दिसंबर 2025 तक सरकार ने करीब 640 पत्रकारों को अपना निशाना बनाया है. कई पत्रकारों को बिना किसी ‘ट्रायल’ के महीनों से जेल में रखा गया है. उन पर हत्या जैसे बेतुके और अतार्किक आरोप मढ़े जा रहे हैं. सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को अपराधी बनाया जा रहा है. प्रेस फ्रीडम का दम घुट रहा है और डर के मारे वहां के पत्रकार अब ‘सेल्फ-सेंसरशिप’ करने को मजबूर हैं.
सोशल मीडिया पर आलोचना पड़ी भारी, बिना कसूर जेल में बंद पत्रकार
‘द डिप्लोमैट’ की रिपोर्ट ने रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे किए हैं. ढाका के पत्रकार अनीस आलमगीर को 14 दिसंबर को अरेस्ट किया गया था. उनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना की थी. अब वे आतंकी धाराओं में मुकदमे का सामना कर रहे हैं और हिरासत में हैं. इसी तरह पत्रकार मोंजुरुल आलम पन्ना को भी महज एक चर्चा में हिस्सा लेने पर फंसाया गया. हैरानी की बात यह है कि यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं. उनका दावा है कि पत्रकार कुछ भी लिखने के लिए आजाद हैं.
