
ईरान के सुप्रीम लीडर के खास ने न्यूक्लियर हथियारों पर बड़ा राज खोला है. ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं चाहता था. उन्होंने इसके पीछे इस्लाम वाला तर्क दिया और कहा कि परमाणु हथियार हराम है. इसे बनाने की इच्छा ईरान की कभी नहीं रही. उन्होंने कहा कि ईरान कुछ मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहता है.
समाचार एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जहां ईरान पर प्रतिबंध हैं और उसके परमाणु प्रतिष्ठानों की बहुत अधिक निगरानी होती है, वहीं कुछ अन्य देशों को ऐसी किसी जांच का सामना नहीं करना पड़ता. उन्होंने कहा, ‘ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं चाहता था क्योंकि यह हराम है. साथ ही ईरान कुछ सामाजिक और मानवीय कामों के लिए शांतिपूर्ण शक्ति यानी परमाणु चाहता है… लेकिन दुर्भाग्य से हमारे लिए दोहरा मापदंड है. कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ईरान के खिलाफ बहुत सारे प्रतिबंध लगाए, और वे ईरान की परमाणु शक्ति पर बहुत ज़्यादा निगरानी रखते हैं, लेकिन कुछ अन्य देशों के पास यह है, वे इसका इस्तेमाल करते हैं, और उनके बारे में कुछ नहीं कहते.’
बता दें कि पिछले साल जून में इजरायल और अमेरिका ने ईरानी परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था. इसमें ईरान का बड़ा नुकसान हुआ था. पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक हुई. यह बैठक परमाणु अप्रसार पर थी. सदस्य देशों में मतभेद रहा. कुछ देश ईरान पर प्रतिबंध फिर से लगाना चाहते हैं. कुछ देश प्रतिबंध हमेशा के लिए हटाना चाहते हैं.
