
मुजफ्फरनगर के बेबस माता-पिता की आंखों में आंसू और जुबां पर सिर्फ एक ही गुहार है. उनके लाडले सात समंदर पार कंबोडिया के नरक में फंस चुके हैं. वहां उन्हें बंधक बनाकर साइबर ठगी के काले धंधे में धकेला जा रहा है. चीन और पाकिस्तान के क्रूर एजेंट मुजफ्फरनगर के इन युवाओं को बेरहमी से टॉर्चर कर रहे हैं. परिजनों का दावा है कि बच्चों को छोड़ने के बदले लाखों की फिरौती मांगी जा रही है. विदेश से आ रहे डरावने वीडियो कॉल ने परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है. हर पल इन युवाओं पर मौत का साया मंडरा रहा है. प्रशासन से लेकर सरकार तक अब गुहार लगाई जा रही है.
डिजिटल अरेस्ट और हनी ट्रैप में फंसाए जा रहे युवा
देश में साइबर अपराध की लहर अब डिजिटल अरेस्ट और हनी ट्रैप से आगे निकलकर साइबर स्लेवरी तक पहुंच चुकी है. न्यूज़ 18 इंडिया की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि चीन और पाकिस्तान के नागरिकों का एक खतरनाक सिंडिकेट भारतीय युवाओं को निशाना बना रहा है. इस साजिश का केंद्र कंबोडिया, थाईलैंड और म्यांमार जैसे देश हैं. पाकिस्तानी एजेंट सोशल मीडिया के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जैसे इलाकों के युवाओं से संपर्क करते हैं. उन्हें विदेश में आलीशान जिंदगी और हाई-प्रोफाइल नौकरी का झांसा दिया जाता है.
