
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद दुनिया में स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर की धज्जियां उड़ गई है. दुनिया के सबसे बड़े और प्रभावी सैन्य संगठन नाटो के भीतर ही सिरफुटव्वल है. नाटो में यूरोप के सदस्य देशों और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध, खाड़ी के देशों में तनाव और अपने यहां पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए भारत की सैन्य ताकत की चर्चा जरूरी हो जाती है.
आज हम भारत की सैन्य क्षमता की तुलना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक स्थायी सदस्य के साथ कर रहे हैं. यह एक ऐसा मुल्क है जिसका कभी पूरी दुनिया पर कब्जा था. उसके राज में सूरज अस्त नहीं होता था. लेकिन आज इस देश की हालत काफी कमजोर हो गई है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं यूनाइेट किंगडम यानी ब्रिटेन की. द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त तक ब्रिटेन दुनिया की सबसे बड़ी ताकत था. लेकिन, युद्ध की बर्बादी के बाद उसकी हनक कम होती गई. हालांकि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का वह स्थायी सदस्य बन गया. इसके पीछे भी उसकी ताकत नहीं बल्कि उस वक्त विजयी राष्ट्रों को ही इस वैश्विक संस्था में स्थायी सदस्य बनने का मौका मिला. इस कारण बाजी उसके हाथ लगी. दूसरी तरफ विश्वयुद्ध में बेहद ताकतवर रहे जापान और जर्मनी जैसे देशों को इससे बाहर रहना पड़ा.
