
भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है. इसे लेकर अमेरिका की नाराजगी एक बार फिर खुलकर सामने आई है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यूरोप ने यूक्रेन युद्ध के बीच अपने घोषित सिद्धांतों से ज्यादा व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दी है. CNBC से बातचीत में बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय देशों का रुख बेहद निराशाजनक है. उनके मुताबिक, यूरोपीय संघ सार्वजनिक मंचों पर यूक्रेन के समर्थन की बात करता है, लेकिन व्यवहार में उसने व्यापार को तरजीह दी. उन्होंने कहा कि यूरोप को अपने हित देखने का अधिकार है, लेकिन इस फैसले ने उसके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
भारत-यूरोपीय यूनियन की डील में क्या है?
यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को अपने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की वार्ताएं पूरी होने की घोषणा की. इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत से आने वाले 99.5 प्रतिशत उत्पादों पर टैरिफ हटाएगा. इनमें से अधिकतर उत्पादों पर समझौता लागू होते ही शुल्क शून्य हो जाएगा. वहीं भारत ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाले कुल व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत हिस्से पर टैरिफ में रियायत देने पर सहमति जताई है. इस समझौते पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय आयोग के व्यापार आयुक्त मारोश शेफचोविच ने संयुक्त राजनीतिक घोषणा पर हस्ताक्षर किए. यह कार्यक्रम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में हुआ.
