
26 जनवरी के दिन UGC के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अब फिर से चर्चाओं में हैं. इस्तीफे के बाद यूपी सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता (Indiscipline) के आरोप में सस्पेंड कर दिया था. मगर अब अग्निहोत्री का एक बड़ा बयान सामने आया है. जिसमें उन्होंने कहा है कि उनका यह कदम किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि सवर्ण समाज, खासकर ब्राह्मण समाज में नेतृत्व की कमी के चलते यह फैसला उठाया गया था.
अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग और ब्राह्मण समाज के छात्रों को नुकसान पहुंचाने वाला है. उनका कहना है कि यूजीसी के नए नियमों के तहत किसी भी छात्र पर आसानी से भेदभाव का आरोप लगाया जा सकता है, जिससे उसका करियर बर्बाद हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे शिक्षा संस्थान पढ़ाई के केंद्र की जगह विवाद और टकराव का मैदान बन सकते हैं. इस्तीफे के बाद जब उन्हें बरेली के जिलाधिकारी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई, तो उन्होंने धरना भी दिया. इसके बाद प्रशासन ने उन्हें शामली जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से अटैच कर दिया, जहां उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी है.
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने 2019 में PCS परीक्षा पास की थी और अगर हालात ऐसे ही रहते, तो आने वाले कुछ वर्षों में IAS अधिकारी भी बनने की उम्मीद थी. मगर उनका मानना है कि जब समाज से जुड़े गंभीर मुद्दों पर नेता शांत हो, तो किसी न किसी को आगे आकर आवाज उठानी ही पड़ती है. उन्होंने यह भी कहा कि मैंने इस मुद्दे को बीजेपी के कई नेताओं के सामने रखा था और साफ शब्दों में कहा था कि अगर ब्राह्मण नेता समाज की चिंताओं को मजबूती से नहीं उठा सकते, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.
