
अमेरिका में इमीग्रेशन नीति को लेकर चल रहे विवाद के बीच पत्रकार और CNN के पूर्व एंकर डॉन लेमन की गिरफ्तारी ने एक नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है. डॉन लेमन को मिनेसोटा के सेंट पॉल शहर में एक चर्च के अंदर हुए विरोध प्रदर्शन को कवर करने के लिए संघीय एजेंटों ने हिरासत में लिया. हालांकि एक दिन बाद उन्हें बिना किसी बॉन्ड के रिहा कर दिया गया. इस प्रदर्शन की वजह से चर्च में चल रही प्रार्थना सभा बाधित हो गई थी. डॉन लेमन के वकील एब्बे लॉवेल के मुताबिक, 18 जनवरी को जब लेमन लॉस एंजिल्स में ग्रैमी अवॉर्ड समारोह को कवर कर रहे थे, उसी दौरान उन्हें संघीय एजेंटों ने गिरफ्तार किया. फिलहाल यह साफ नहीं है कि लेमन पर किस धारा में आरोप लगाए गए हैं, क्योंकि केस से जुड़े कई दस्तावेज अभी सील हैं. रिहा होने के बाद लेमन ने कहा कि वह रिपोर्टिंग करना जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई चलती रहेगी.
क्या था पूरा मामला?
यह घटना जनवरी की शुरुआत में मिनेसोटा के सिटीज चर्च में हुई, जहां रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अमेरिकी इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के स्थानीय फील्ड ऑफिस के प्रमुख उसी चर्च के पादरी भी हैं. इसी बात को लेकर इमीग्रेशन विरोधी कार्यकर्ताओं ने चर्च के अंदर जाकर प्रदर्शन किया.
डॉन लेमन और स्थानीय स्वतंत्र पत्रकार जॉर्जिया फोर्ट उस समय इस प्रदर्शन को कवर कर रहे थे. अधिकारियों का कहना है कि कुल सात लोगों पर संघीय कानूनों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है, जिनमें प्रदर्शन आयोजित करने वाले लोग भी शामिल हैं. हालांकि पत्रकारों के खिलाफ आरोपों का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. इस घटना की कड़ी निंदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी और कई अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने की. उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर इस तरह का व्यवधान कानून के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कई धार्मिक नेताओं ने भी चर्च के अंदर हुए प्रदर्शन को गलत बताया.
