
फर्जी लूट मामले में एक शख्स को तीन साल तक जेल भेजने के मामले में अदालत ने पुलिस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. इस मामले में संभल की एक अदालत ने 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश बुधवार को ओमवीर कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. 50 वर्षीय ओमवीर का आरोप है कि पुलिस ने किसी ब्रेकथ्रू को दिखाने के लिए उन्हें झूठे लूट के मामले में फंसाया और सार्वजनिक रूप से अंतरराष्ट्रीय चोर के रूप में पेश किया. ओमवीर के वकील सुकांत कुमार ने बताया कि अदालत ने दो इंस्पेक्टर, चार सब-इंस्पेक्टर और सात अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं.
पुलिस के मुताबिक, 25 अप्रैल 2022 को संभल में दूध विक्रेता दुर्वेश से एक लाख रुपये की लूट हुई थी. इस मामले में 7 जुलाई 2022 को ओमवीर और ऋषिपाल को गिरफ्तार किया गया. हालांकि, अदालत और जेल के रिकॉर्ड से सामने आया कि ओमवीर उसी समय बदायूं जेल में थे और 11 अप्रैल से 12 मई 2022 तक आर्म्स एक्ट के एक मामले में बंद था. अदालत ने सवाल उठाया कि जब ओमवीर पहले से जेल में थे तो वे लूट कैसे कर सकते थे.
ओमवीर ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान से पुरानी रंजिश के कारण उन्हें निशाना बनाया गया और कुछ पुलिसकर्मी प्रधान के संपर्क में थे. उन्होंने कहा कि लंबित मामलों में नतीजे दिखाने के दबाव में पुलिस ने उन्हें और ऋषिपाल को गिरफ्तार किया, प्रेस कॉन्फ्रेंस में खूंखार अपराधी बताकर पेश किया और 19 क्षतिग्रस्त मोटरसाइकिलों को बरामदगी के रूप में दिखाया.
