
बांग्लादेश में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हैं. छात्र और युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. ढाका यूनिवर्सिटी में शेख मुजीब के नाम पर बने हॉल को उस्मान हादी के नाम पर रखने की मांग उठी है. यानी कट्टरपंथी अब बांग्लादेश के राष्ट्रपिता से बड़ा एक जहरीले आदमी को मानते हैं. इस बीच अंतरिम सरकार ने उस्मान हादी के नमाज ए जनाजा से जुड़े कार्यक्रमों में बदलाव किया है और ढाका समेत कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. सरकार ने हिंसा की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए साफ कहा है कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में प्रशासन ने हादी की जनाजे की नमाज के समय में बदलाव की घोषणा की. सरकार की ओर से एक्स पर जारी पोस्ट में कहा गया कि शहीद उस्मान हादी की जनाजे की नमाज अब 19 दिसंबर को दोपहर 2 बजे ढाका के जातीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में होगी. पहले इसका समय 2 बजकर 30 मिनट बताया गया था. प्रशासन ने जनाजे में शामिल होने वालों के लिए सख्त सुरक्षा निर्देश भी जारी किए हैं. लोगों से कहा गया है कि वे बैग या भारी सामान लेकर न आएं. संसद भवन और उसके आसपास ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.
हिंदू शख्स की मौत से बवाल
इसी बीच बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल ने मयमनसिंह के भालुका इलाके में हिंदू गारमेंट वर्कर दीपू चंद्र दास की हत्या की कड़ी निंदा की है. परिषद ने कहा कि 18 दिसंबर की रात करीब 9 बजे कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट पीटकर मार डाला. इसके बाद शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई. संगठन ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली जघन्य घटना बताया और दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की. अंतरिम सरकार ने भी इस हत्या की तीखी निंदा की. सरकार ने बयान जारी कर कहा कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और इस अपराध के दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी
