
दक्षिण-पूर्व लंदन के एक केएफसी फ्रैंचाइजी आउटलेट के मैनेजर द्वारा एक भारतीय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी काफी भारी पड़ गया. अब इस मामले में अदालत ने मैनेजर पर एक दो लाख का नहीं बल्कि पूरे 74 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. दरअसल, तमिलनाडु के रहने वाले मधेश रविचंद्रन ने अपने प्रबंधक पर नस्लीय भेदभाव और गलत तरीके से नौकरी से निकालने का आरोप लगाया था. एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को लगभग 67,000 पाउंड (लगभग 74 लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है.
ट्रिब्यूनल की सुनवाई में रविचंद्रन ने बताया कि उनका श्रीलंकाई तमिल बॉस काजन उनके साथ भेदभाव करता था. वह रविचंद्रन के लिए ‘गुलाम’ तथा ‘भारतीय धोखेबाज होते हैं’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करता था. इस सप्ताह प्रकाशित ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार जज पॉल एबॉट ने रविचंद्रन के गलत बर्खास्तगी और नस्लीय भेदभाव के दावों को सही ठहराया.
नहीं देता था छुट्टी
ट्रिब्यूनल ने पाया कि रविचंद्रन को कम अनुकूल व्यवहार का सामना करना पड़ा क्योंकि वह भारतीय थे. उदाहरण के तौर पर उनकी छुट्टी की अर्जी इसलिए खारिज कर दी गई क्योंकि प्रबंधक काजन श्रीलंकाई तमिल सहकर्मियों की छुट्टियों को प्राथमिकता देना चाहता था. इसके अलावा, उन्हें गंदा और गुलाम कहकर पुकारा गया, जो स्पष्ट रूप से नस्ल के कारण कम अनुकूल व्यवहार था.
